दिल्ली कूच करने से पहले अन्ना ने भरी हुंका
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दिल्ली कूच करने से पहले अन्ना ने भरी हुंका
नई दिल्ली / रालेगण सिद्धी।। करप्शन के खिलाफ जंग का ऐलान कर चुके अन्ना हजारे ने सशक्त लोकपाल के लिए तीसरी जंग की शुरुआत कर दी है। लोकपाल पर स्थायी समिति की रिपोर्ट से नाखुश अन्ना रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक दिन का धरना-प्रदर्शन करेंगे। इसके लिए शनिवार को वह रालेगन सिद्धि से दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं।
दिल्ली रवाना होने से पहले हजारे ने अपने गांव में सरकार पर नए सिरे से हमला बोलते हुए कहा है कि देश में आजादी की दूसरी लड़ाई शुरू हो चुकी है और यह भ्रष्टाचार को खत्म करने तक चलती रहेगी। उन्होंने कहा, 'हमारी आजादी के लिए कई शहीदों ने अपनी जान की कुर्बानी दी थी, लेकिन हम आज भी खुद को आजाद महसूस नहीं कर पा रहे हैं। आजादी किसे मिली है। आजादी क्या है। भ्रष्टाचार और लूट आज भी है। गोरे चले गए और ये काले आ गए। सिर्फ यही अंतर है।'
उन्होंने कहा, 'आजादी की दूसरी लड़ाई शुरू हो चुकी है। यह लंबी लड़ाई है और भ्रष्टाचार को मिटाने तक जारी रहेगी। बहुत लोगों को जेल जाना होगा, लाठियां खानी होंगी और कुछ को कुर्बानी देनी होगी। यह वक्त अब आ गया है। जब तक हम बलिदान नहीं देंगे तब तक सही आजादी नहीं मिलेगी।'
इसके पहले शुक्रवार को टीम अन्ना कहा कि स्थायी समिति ने लोकपाल का जो मसौदा संसद के सामने रखा है, उससे करप्शन घटेगा नहीं बल्कि बढ़ेगा। टीम अन्ना ने इसकी विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़ कर दिए। टीम के सदस्यों ने कहा है कि इसे सिर्फ 12 सदस्यों का ही समर्थन हासिल है और वे इसका पुरजोर विरोध करेंगे।
टीम अन्ना के प्रमुख सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'स्थायी समिति में 30 सदस्य हैं। 2 सदस्यों ने कभी इसमें हिस्सा नहीं लिया। 16 सदस्य इससे असहमत हैं, इसलिए इस रिपोर्ट को सिर्फ 12 सदस्यों की सहमति हासिल है। 7 कांग्रेस के हैं, इसके अलावा लालू प्रसाद यादव, अमर सिंह और मायावती की बीएसपी के सदस्य हैं।' उन्होंने कहा, 'इस रिपोर्ट की यही विश्वसनीयता है।'
केजरीवाल ने दावा किया कि समिति की सिफारिशों को अगर लागू किया गया तो इससे करप्शन बढ़ेगा और सीबीआई की कार्यप्रणाली बंट जाएगी। उन्होंने कहा, 'रिपोर्ट हमारी भ्रष्टाचार निरोधक सिस्टम को 2 कदम पीछे ले जाएगा।'
गौरतलब है कि अन्ना का सांकेतिक धरना यह संदेश देने के लिए है कि अगर शीतकालीन सेशन में केंद्र सरकार ने लोकपाल बिल पास न किया, तो उनकी लड़ाई की शुरुआत 27 दिसंबर से पहले 8 दिन रामलीला मैदान और बाद में 5 राज्यों के दौरे के रूप में शुरू हो जाएगी। प्रस्ताव में उनकी मुख्य मांगों को शामिल नहीं किया गया है जैसे निचली नौकरशाही को लोकपाल के दायरे में लाना और सिटीजंस चार्टर लागू करना।
टीम अन्ना की अहम सदस्य किरण बेदी ने भी केजरीवाल की बातों पर सहमति जताई और कहा, 'सीबीआई की जांच की शक्तियों को लोकपाल से बाहर रखकर गलत किया गया है।' उन्होंने कहा, 'यह जानना जरूरी है कि सीबीआई की जांच शक्तियां लोकपाल के साथ आवश्यक क्यों है। सीबीआई को पूरी तरह से लोकपाल के तहत लाया जाए।' उन्होंने कहा कि लोकपाल बनाने का कारण सीबीआई जांच को राजनीतिक दबाव से छुटकारा दिलाना था।
अन्ना सरकार को आगाह कर चुके हैं कि जब तक ग्रुप-सी और डी के कर्मचारियों के साथ-साथ सीबीआई और पीएम लोकपाल के अधीन नहीं लाए जाते, तब तक देश से करप्शन को पूरी तरह मिटा पाना नामुमकिन है। इसलिए वह 11 को सिर्फ आंदोलन की एक झांकी देने जा रहे हैं। अन्ना की असली लड़ाई 27 दिसंबर से शुरू होगी। तब तक संसद का शीतकालीन सत्र पूरा हो चुका होगा। अन्ना के समर्थन में मुंबई समेत देश में कई जगह आंदोलन में लोगों ने शरीक होने की घोषणा कर दी है।
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